(प्रेम) कवितायें

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 यह कवितायें भारतीय ज्ञानपीठ की पत्रिका के ‘प्रेम महाविशेषांक’ 3 में प्रकाशित हुई हैं, सितंबर 2009 – यह अंक अगला अंक आने तक यहाँ से डाउनलोड किया जा सकता है.

  1

उसके हाथ किसी कारखाने में बने हुए लगते हैं वे जेब में आराम कर रहे हैं

अगर ये तुम्हारे किसी काम का न हो तो मैं ले जाती हूँ बाहर आते हुए मेरी नज़र पड़ी थी कु़छ खास नहीं था पर मुझे कई सालों से गमले खरीदने थे – लगा वो क्या मना करेगा उसे किसी ने कभी कुछ उगाने की कोशिश करते तक नहीं देखा था

उसकी आँखें मेरे पड़ौसियों की तरह हैं मुझसे अनजान

नहीं उसने अचानक बहुत अजनबी होते हुए कहा अगर ऐसे न कहा होता तो मैं ठीक है कह कर निकल गयी होती पर वह कुछ कहना चाहता था कोई कहानी उस गमले के बारे में जो उसे उसी वक्त बुननी पड़ रही थी

वह किसी सैनिक की तरह चूमता है उसके होठ कोई चाकू से चीर देगा कई सालों बाद

मैं बाहर निकल आयी गमला वहीं पड़ रह गया हमेशा के लिये – उसने एक गन उठाई और उसे रोप दिया एक पौधे की तरह और पानी ढूँढने लगा घर में

 2

सपने में उसने मुझसे चाय बनाने के लिये कहा वह कई शहरों की लम्बी यात्राएँ करके लौटा था मैंने उसके लिये भिंडी काटना शुरू किया उसने कहा वह इडली खाना चाहता है मैंने वह करना शुरू कर दिया उसके कपड़े धोने के लिये अलग पहले ही कर लिये थे कि तभी वह एक छोटे से पौधे में बदल गया और मुझे लगा अब वह कैसे कहेगा कि मुझे उसे पानी देना चाहिये घर में पानी दो दिन से नहीं था वह शायद मेरी दुविधा भाँप गया और पानी बन कर बहने लगा बहकर वो घर से बाहर चला जायेगा इसलिये मैंने उसे हाथों में ले ले कर घड़े में भरना शुरु कर दिया कि तभी वह चिल्लाया कितना समय लगा रही हो चाय बनाने में मैंने कहा दो हाथ हैं मेरे पहले हाथ का काम कर लेने दो तुम तो ऐसे बिगड़ रहे हो मानो हमने साथ रहना शुरु कर दिया है 

3

मेरी अंगुलियाँ देख रही थीं एक जेब भी कितनी वीरान हो सकती है वह सोया हुआ था मुझे यकीन था मैं पकड़ी नहीं जाऊंगी जेब में हाथ डालते हुए सोचा था वहाँ कु़छ सिक्के कुछ नोट होंगे शायद पर्स फोन कुछ कागज़ कॉर्ड पर वह एक बिल्कुल वीरान जेब थी उसमें कोई कहानी तक न थी और देखो भले मानस को कैसी चैन की नींद सो रहा था

सुबह उठकर बोला कोई मेरी जेब में अपनी अंगुलियाँ छोड़ गया क्या करूंगा इन निकम्मी अंगुलियों का जो एक जेब के खालीपन से हार गईं

4

रतिरात्रि ही मैंने नींद में देखा तुमने मुझे विस्मृत कर दिया है तुमने अपनी नींद में देखा मैंने तुम्हारी मुद्रिका को खो दिया है

कालिदास कुपित हैं अब वे शाप किसे देंगे?

(प्रेम) कवितायें&rdquo पर एक विचार;

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