मनदीप और अमरजीत

DSC00113नौ-दस बरस पढ़ाने के दौरान मुझे कई अनोखे, प्यारे छात्र मिले हैं; मनदीप और अमरजीत उनमें से हैं। मनदीप एक शर्मीली कवि और हैरान करने वाली बात यह कि उतनी ही शर्मीली  एथलीट थी लेकिन उस तरह के होनहारों जैसी नहीं जो कविता और खेल दोनों में सिर्फ मैडल, सर्टिफिकेट पाने के लिये होते हैं -उसकी लाँग जम्पिंग और उसकी कविताई में क्या संबंध था यह मैं उस पर कविता लिखने की प्रक्रिया में ही देख पाया। उसकी साहसी बहन अमरजीत से मैंने बहुत सीखा हैः सफल लोगों से नहीं सही लोगों से ईर्ष्या करना, अपने दुख की या अपने आप की  दूकान नहीं लगाना और हर गड़बड़ी के लिये कुछ जिम्मेवार खुद को भी मानना. दोनों बहनों का बहुत गहरे तक कृतज्ञ हूँ। अब उनसे कोई सम्पर्क नहीं रहा, जब उनसे आखिरी बार बात हुई दोनों खुद अध्यापिकाएँ बनने वाली थीं. आज की यह पोस्ट उनके साथ साथ गजानंद, विकास, निशा और कंचन के लिये भी जिनमें से एक गजानंद को छोड़कर सब लापता हो गये हैं.

 

चार सौ विवाह और दो अन्तिम संस्कार

 कैसे देखते होंगे दो शव उन चार सौ विवाह उत्सवों को जिनकी रौनक के बीच से गुजर कर उन्हें शमशान तक पहुंचाना है कैसे देखती होंगी पान की दुकानें शवों और दूल्हों को एक दूसरे के पास से होकर गुजरते हुये

दोराहों, तिराहों, चौराहों की तरह कुछ ऐसी भी जगहें इस नगर में हैं जहाँ दसों दिशाओं से आकर खुलता और सिमटता है संसार उनमें से आठ से विवाह और दो से अन्तिम संस्कार की यात्राएँ बीचों बीच बने चबूतरे की ओर बढ़ रही हों तो शव और पान की दुकानें ही कोई भी अचानक फंस सकता है इस खतरनाक प्रश्न की जकड़ में कि वह किस यात्रा में है

मातम गुनगुना रहे कवियों के बीच कभी उम्मीद और कभी विलाप की तरह सुनाई देती है तुम्हारी आवाज़

 

अमरजीत कौर

मुझे नहीं पता था दूसरे की आँख से देखने पर संसार कविता हो जाता है पर मुझे पता था कितने आघात से रखना होता है पैर ओस से ढकी घास पर और मैले-कुचैले कपड़ों की किस तह में रखना होता है उन चीज़ों को जिन्हें पा नही सकती मैं

मुझे पता था भिंची हुई मुट्ठियों  और अपनी खुश्बुओं से भरी आँखों को एक दूसरे की मित्र कैसे होना होता है और यह भी कि बंजरता का एक मौन नगाड़ा होता है जो कानों को नहीं आँखों को सुनाई देता है

पर मुझे पता क्या था दूसरे की कल्पना से जानने पर एक कवि हूँ मैं!

 

मिस शर्मा एमए अंगरेज़ी

मैंने चौथी में शेक्सपीयर का नाम सुना था और अगर देखा-देखी में नहीं किया होता एमए तो मैंने नहीं सुने होते वर्डसवर्थ, कीट्स और डेस्डेमोना और मेफिस्टोफिलिस जैसे अजीबोगरीब नाम दरअसल मैंने ये जी का जंजाल एमए नहीं ही किया होता तो?

तो मैं ये भी नहीं जानती कि मेरे अंदर रहती है एक दूसरी मिस शर्मा जिसका जन्म हुआ था कीट्स की एक कविता पढ़े जाने से ठीक आधे धंटे पहले जब दिसंबर की एक सुबह कोहरे में मैं उछल गई थी हवा में कोई तिनेक फुट!

सोचकर हैरत होती है कहाँ छुपी थी वो छलांग मेरे शरीर में पर जहाँ भी थी वहाँ अब रहती थी एक दूसरी मिस शर्मा जिसके मन में नहीं था बचपन का नरक जिसे याद नहीं थी उन शहरों और लड़कों की जिससे घुटता रहता है मेरा दम

मैं बेताब थी इस दूसरी को कोई नाम देने को कि मैंने एक दिन सुना ये नाम- एन हैथवे जब तक मुझे पता चलता कौन थी एन हैथवे अपने को लगभग तबाह कर चुका था एक कवि मेरे इश्क में, मेरे नहीं, मेरी एन के और मैं फिर से उबल रही थी बचपन जैसे नरक में

एन गई डूब कवि के मेटाफर्र में

और मैंने फिर रुख किया उन शहरों और लड़कों की तरफ जहाँ मुझे खेतों में बेहोश हो जाने वाली… क्या नाम था उसका? हाँ… रूथ, उस रूथ की तरह रोते रहना था

 

मनदीप कौर

सामने हवा होती है
और दूर तक फैली पृथ्वी
अपने को पूरा झोंककर मैं दौड़ती हूँ
हवा के खिलाफ़
और किसी प्रेत निश्चय से लगाती हूँ छलांग

उसी हवा में –

                        मानो उड़कर इतनी दूर चली जाऊँगी
                        कि ख़ुद को नज़र नहीं आऊँगी

पर आ गिरती हूँ इसी पृथ्वी पर
इतनी पास मानो यहीं थी हमेशा –

                                                ऎसी ख़फ़गी होती है
                                                अपने आप से
                                                और इस मिट्टी से!

अब तक इतना ही पता चला है

अपने से खफ़ा हुए बिना नहीं हूँ मैं
मुझे नहीं पता ठीक से
पर

                                                अपने से दोस्ती करने के लिए
                                                तो नहीं ही लिखती हूँ मैं!

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नोटः एन हैथवे शेक्सपीयर की, उससे उम्र में काफी बड़ी और ताउम्र एकमात्र, पत्नी थी। रूथ बाईबिल में एक मुख्य चरित्र है उसके नाम से ‘द बुक ऑव रूथ’ है। उसकी कहानी ये है वह परदेस ब्याह दी गई और पति के कमाने के लिये बाहर चले जाने के बाद अपनी सास के साथ, उसकी देखभाल करते हुए रहने लगी। जॉन कीट्स ने अपनी एक कविता में खेत में काम करते हुए बेहोश जाने वाली रूथ का बिम्ब खींचा है। और कीट्स एमए अंगरेज़ी के सब पाठ्यक्रमों में होते हैं इसी कारण मिस शर्मा के जीवन में भी आ गये। महज 26 बरस की उम्र में टीबी से मर गया यह अंग्रेज सौन्दर्य और नश्वरता का एक साथ बहुत सेंसुअस और बहुत सहमा देने वाला कवि रहा है मेरे लिये।

(प्रथम प्रकाशनः पहली तीन का प्रभात खबर दिवाली विशेषांक 2008 में, अंतिमः कथाक्रम/ फोटोः स्वयं)

मनदीप और अमरजीत&rdquo पर एक विचार;

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