दो प्रिय कविः दो अनुवाद

1  

अपनी कुछ कविताओं में प्रभात, मनोज कुमार झा और शिरीष कुमार मौर्य जितना करीब से हो कर गुजरते हैं उतना दूसरे समकालीन नहीं.   

2  

अनिरुद्ध उमट (जन्मः 1964) मुझसे ग्यारह बरस बड़े हैं. हिन्दी में उनके जितना जोखिम, लेखन में, उठाने वाले लेखक बहुत कम हैं. एक कविता संग्रह और दो उपन्यास प्रकाशित हैं. खतरनाक ढंग से यथार्थ के बारे में हर  उपलब्ध संज्ञान हर विज्ञापित संजाल की पकड़ से बाहर  ये उपन्यास एक ऐसे व्यक्ति ने लिखे हैं जिसकी शिक्षा पूरी नहीं हुई और जो बीकानेर जैसे एक रेगिस्तानी शमशान (उनके शब्दों में) में एक सरकारी स्कूल में, सदियों से, बाबू है. पिछले दस-बारह साल से मैं इस जिद्दी और रहस्यमय आदमी को जानता हूँ. बीकानेर में वे एक साथ सम्मान, गॉसिप और ईर्ष्या के पात्र हैं – भाई की किताबें राजकमल और वाणी जैसे प्रकाशक छापते हैं साला चक्कर क्या है बहुत पहुँची हुई चीज़ है गुरू , रोज शाम को छह-सात किलोमीटर स्कूटर चलाकर अपने, अपने भाई और अपने पिता के घरों के लिये छह किलो दूध बिला नागा पन्द्रह बरस लाना कोई मामूली बात नहीं है भई कुछ भी कहो अनिरुद्ध में लगन बहुत है अपनी धुन का पक्का है पर पगलाई की हद होती है दफ़्तर में ब्रेख़्त की कविता चिपका रखी है यार अपन पढ़ते नहीं इसको लेकिन काम तो जोरदार ही है भाई का… 

3  

मैं बहुत कुछ अंग्रेजी (अनुवाद) में, पढ़ता हूँ, कभी कभी खुद अनुवाद करता हूँ लेकिन मेरे सबसे अंतरंग पाठ वही हैं जो मैंने हिन्दी में पढ़े हैं. कल कुछ ऐसा हुआ कि अनिरूद्ध और मनोज की एक एक कविता का अनुवाद करना पड़ा. आपकी प्रतिक्रियाओं से इन्हें बेहतर करने में मदद मिलेगी.चित्र हेमराज के हैं.  

(नोटः किसी  कारण से अनिरुद्ध की कविता में पैराब्रेक नहीं दिख रहे हैं, थोड़ा अनुमान से पढ़ें तब तक मैं इसे फिक्स करने की कोशिश करता हूँ) 

   

Ambivalence: Manoj Kumar Jha 

Translated from Hindi by Giriraj Kiradoo  

Rub your back against the back of the fire, wind water creepers around your feet, pull a thread out of the night’s sheet and mix it up with the morning’s cotton, hide your face behind a lotus leaf, stroke your cheek against a rose and let someone photograph you, jump down from the train to see the peacocks dance and wave hands, in fever, to the marchers  

Is it a cloud pouring water on the riverbank where my desires wash clothes or just a shapeless stone, seized by a bizarre gravity, rolling on and on…..  

संशयः मनोज कुमार झा  

आग की पीठ से पीठ रगड़ना कभी, कभी पैरों में बाँध लेना जल की लताएँ

रात की चादर की कोई सूत खींच लेना फेंट देना उसे सुबह के कपास में

कमल के पत्ते से छुपाना चेहरा, फोटो खिंचवाना गुलाब से गाल सटाकर

ट्रेन से कूदना देखने मोर का नाच और बुखार में हाथ हिलाना जुलूसियों को  

कोई मेघ उड़ेलता उस घाट जल जहाँ मेरी लालसाएँ धोती हैं वस्त्र

या बस लुढ़क रहा एक पत्थर बेडौल अटपट गुरूत्त्व के अधीन  

Proper Place: Aniruddh Umath 

Translated from Hindi by Giriraj Kiradoo 

Sea, sky 

river, mountain 

nothing is in its place 

I look into the mirror 

empty air fills the 

moment of recalling 

a wild oblivion 

shatters everything 

One day, you will come, exasperated 

and put everything neatly in its place 

As ever, you will not even turn back and glance 

I too would perhaps be put in my proper place 

I’d look down and find there is no ground underneath! 

सही जगहः अनिरुद्ध उमट 

कुछ भी तो अपनी जगह नहीं 

न समंदर न आकाश 

न पर्वत न नदिया 

देखें अगर किसी क्षण 

अपना चेहरा आईने में 

तो वहाँ हवा पाई जाती 

तुम्हारे स्मरण के क्षण में 

विस्मरण पगलाया-सा सब कुछ 

कर देता है तहस-नहस 

किसी दिन इस सबसे 

आजिज आ 

तुम प्रकट होओगी और 

सलीके से हर चीज़ को उसकी 

जगह 

थमाती चली जाओगी 

मुड़ कर तनिक भी तुम 

हमेशा की तरह 

इस बार भी न देखोगी 

मैं भी शायद इस बीच सही 

जगह पर रख दिया गया हूँ 

नीचे देखता हूँ 

तो वहाँ ज़मीन नहीं होती

2 विचार “दो प्रिय कविः दो अनुवाद&rdquo पर;

  1. achchhaa ji …. to main bhi hun…. bahut khoob.
    ***
    vaise tumhari pasand ke ye kavi mujhe bhi pasand hain. achchhe anuvaad. manoj ki kavitaon se na jane kyon baba bhi yaad aate hain…jabki koi aisa khula saamy ya prabhaav nahin hai…tab bhi aur yahi baat mujhe hamesha uski or kheenchti jaati hai…apne dhang se wo ek bahut bade kavi yaad dilata hai…
    ***
    net ki raftaar dhoka de rahi hai isliye hindi mein type nahin kar paaya….aur kavitaon par utna kah bhi paaya…fir kabhi. donon kaviyon ko shubhkaamna.
    ***
    shirish

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s