अयोध्या के नाम एक शोकगीत: असद ज़ैदी

कौन नहीं जानता
अयोध्या में सभी कुछ
काल्पनिक है

वह मस्जिद जिसे
ढहाया गया
वह काल्पनिक थी

वे तस्वीरें
किसी मशहूर फ़िल्म
के लिए थीं

वह एक दोपहर की झपकी थी
एक अस्त-व्यस्त सा
स्वप्न था
या किसी का ख़र्राटा

जिसकी आवाज़ के पर्दे में मेहराब के चटकने की
ख़फ़ीफ़ सी आवाज़ धुल गयी
कुछ गुंबदें धीमी गति से गिरती चली गईं
काले-सफ़ेद धुंधलके में

2

इस मलबे के पीछे कुछ दूर जाकर
नदी के उस तरफ़ कई क़ब्रें हैं
जिनमें दबी हैं कुछ कहानियाँ
ज़ंग लगा एक चिमटा
तांबे का प्याला
एक तहमद एक लाठी एक दरी
मेंहदी से रंगे बाल
2 X 3 इंच का नीले शीशे का
चमकदार टुकड़ा
और इसी तरह कुछ अटरम-सटरम

हर शै ख़ामोश
लेकिन अपनी जगह से कुछ सरकी हुई

हर शै, दम साधे,
हमारी तरह,
किसी इंतज़ार में।

3

नहीं ऐसा कभी नहीं हुआ
मनुष्य और कबूतर ने एक दूसरे को नहीं देखा
औरतों ने शून्य को नहीं जाना
कोई द्रव यहाँ बहा नहीं
फर्श को रगड़कर धोया नहीं गया

हल्के अंधेरे में उभरती है एक आकृति
चमकते हैं कुछ दाँत
कोई शै उठती है कील पर टंगी कोई चीज़
उतारती है चली जाती है

नहीं कोई बच्चा यहाँ सरकंडे की
तलवार लेकर मुर्गी के पीछे नहीं भागा

बंदरों के क़ाफ़िलों ने
कमान मुख्यालय पर डेरा नहीं डाला

मैंने सारे लालच सारे शोर सारे
सामाजिक अकेलेपन के बावज़ूद केबल कनेक्शन
नहीं लगवाया

चचा के मिसरों को दोहराना नहीं भूला
नहीं बहुत-सी प्रजातियों को मैंने
नहीं जाना जो सुनना न चाहा
सुना नहीं, गोया बहुत कुछ मेरे लिये
नापैद था

नहीं पहिया कभी टेढ़ा नहीं हुआ

नहीं बराबरी की बात कभी हुई ही नहीं
(हो सकती भी न थी)

उर्दू कोई ज़बान ही न थी

अमीरख़ानी कोई चाल ही न थी

मीर बाक़ी ने बनवायी जो
कोई वह मस्जिद ही न थी

नहीं तुम्हारी आँखों में
कभी कोई फ़रेब न था।

(कल के ‘फ़ैसले’ के बाद असद ज़ैदी की इन कविताओं में मानो एक नया स्वर-‘प्रोफेसी’ – का जुड़ गया है और वे लगातार पीछा कर रही हैं। अलग अलग शीर्षक वाली इन तीन कविताओं (सामान की तलाश, 2008) को यहाँ एक कविता की तरह, अयोध्या के नाम एक शोकगीत की तरह पढ़ा गया है। तस्वीर यहाँ से साभार)

6 विचार “अयोध्या के नाम एक शोकगीत: असद ज़ैदी&rdquo पर;

  1. इस वक़्त जब बुद्धीजीवियों में चालाक ख़ामोशी हो या फिर वे प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष जश्न में शामिल हों तो इस पोस्ट का बेहद महत्व है. `प्रोफेसी` वाली आपकी बात सही है. काश ये भविष्यवाणी झूठी ही होतीं…

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