मिथक, अभिभूत-दशा-मार्ग, और ‘शांता’

(मिथकों के बारे में दिलचस्प बात यह है कि आलिम फ़ाजिल लोग जो खुद उनमें यकीन नहीं करते (और अपने अलावा किसी को मिथकीय होते देखना बर्दाश्त नहीं कर सकते) वही उनके बारे में सबसे ज्यादा हाय-तौबा मचाते हैं। सबआल्टर्न संसारों में मिथक पान-बीड़ी की तरह होते हैं, जब तलब लगी तो लगी और जैसी-जितनी…