लौटने के दो गीत: प्रभात रंजन की नयी कविताएँ

कई मित्रों को आप बरसों बरस जान कर भी उनके बारे में पूर्वानुमान नहीं लगा पाते. एक तरह का ‘एलिमेंट ऑफ सरप्राइज़’ उनके पास सदैव होता है. प्रभात रंजन ऐसे ही मित्र हैं. कभी भी एक लय में ज्यादा देर  नहीं रहते.  वे शुरू से प्रतिलिपि पत्रिका के न सिर्फ नियमित और महत्वपूर्ण लेखक रहे…